Sunday, March 22, 2015

दहेज

नई- नवेली साथ में लावे खूब दहेज,
मोटर टीवी फ्रिज घड़ी महंगीवाली सेज।
महंगी वाली सेज भले घर जले न चूल्हा,
लेकिन मुँह फैलाय यहाँ बैठा हर दूल्हा।
हम भारत के लोग चाहते फ्लैट-हवेली,
लेकर आवे साथ दुल्हनिया नई-नवेली।
- ओमप्रकाश तिवारी

Thursday, March 12, 2015

सियासत

काजल की यह कोठरी यहाँ न उजला कोय,
दिखलाओ वह शख्स जो धुला दूध का होय।
धुला दूध का होय सियासत सिर्फ छलावा,
कौए ठोकें रोज हंस होने का दावा।
हम भारत के लोग जिन्हें समझें गंगाजल,
राजनीति में आय वही हो जाते काजल।
- ओमप्रकाश तिवारी 

दिखावा

पहनावा मखमल ज़री घर ना भूनी भाँग,
चने-मुरमुरे जेब में पाँच सितारा स्वाँग ।
पाँच सितारा स्वाँग बात में गगनबिहारी,
ले दो हल्दी गाँठ बने बड़के पंसारी।
हम भारत के लोग करें भरपूर दिखावा,
फिर चाहे बिक जाय स्वयं तन का पहनावा।
- ओमप्रकाश तिवारी 

बेटे की चाह

पूजा काली की करें दुर्गा का उपवास,
लक्ष्मी जी से भी रहे सबका रिश्ता खास।
सबका रिश्ता खास मगर इक आदत घटिया,
लेते मुँह लटकाय जबहिं घर आवै बिटिया।
हम भारत के लोग रूप तब बदलें दूजा,
जब घर जन्मे पूत करें सब उसकी पूजा।
- ओमप्रकाश तिवारी