काजल की यह कोठरी यहाँ न उजला कोय,
दिखलाओ वह शख्स जो धुला दूध का होय।
धुला दूध का होय सियासत सिर्फ छलावा,
कौए ठोकें रोज हंस होने का दावा।
हम भारत के लोग जिन्हें समझें गंगाजल,
राजनीति में आय वही हो जाते काजल।
- ओमप्रकाश तिवारी
दिखलाओ वह शख्स जो धुला दूध का होय।
धुला दूध का होय सियासत सिर्फ छलावा,
कौए ठोकें रोज हंस होने का दावा।
हम भारत के लोग जिन्हें समझें गंगाजल,
राजनीति में आय वही हो जाते काजल।
- ओमप्रकाश तिवारी
No comments:
Post a Comment