ऊँ
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दादा के खोदे सभी पाट दिए तालाब,
मंगवाते हैं ट्रेन से अब पीने को आब।
अब पीने को आब चली यदि यही कहानी,
लाएगा तब प्लेन टेम्स नदिया का पानी।
हम भारत के लोग प्रगति कर बैठे ज्यादा,
तभी स्वर्ग में आज दुखी भागीरथ दादा।
- ओमप्रकाश तिवारी
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